ए.आर. रहमान
| अल्लाह रक्खा रहमान | |
|---|---|
ए.आर. रहमान | |
| आयुष्य | |
| जन्म | ६ जानेवारी, १९६७ |
| जन्म स्थान | चेन्नई, तमिळनाडू |
| संगीत साधना | |
| गायन प्रकार | संगीत दिग्दर्शक, गीतकार, पार्श्वगायक |
| संगीत कारकीर्द | |
| कारकिर्दीचा काळ | १९८७ - चालू |
अल्लाह रक्खा रहमान (तामिळ: ஏ. ஆர். ரகுமான், जन्म नाव: ए.एस. दिलीपकुमार, திலீப் குமார்) हे एक जगप्रसिद्ध भारतीय संगीतकार आहेत. आपल्या काळामधील सर्वश्रेष्ठ संगीतकार मानल्या जात असलेल्या रहमानने आजवर अनेक भाषांमधील चित्रपटांना संगीत देऊन जगभरातील चाहत्यांची मने जिंकली आहेत. रोजा, बॉम्बे, रंगीला, दिल से, लगान, रंग दे बसंती हे त्यांचे काही उल्लेखनीय चित्रपट आहेत. २००८ साली प्रदर्शित झालेल्या स्लमडॉग मिलियोनेर ह्या इंग्रजी चित्रपटाच्या संगीतासाठी ए. आर. रहमान यांना अनेक आंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिळाले.
रहमान यांना आजवर दोन ऑस्कर पुरस्कार, दोन ग्रॅमी पुरस्कार, एक बाफ्टा पुरस्कार, एक गोल्डन ग्लोब पुरस्कार, चार राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार, १५ फिल्मफेअर पुरस्कार व १३ फिल्मफेअर पुरस्कार दक्षिण मिळाले आहेत. आजवरच्या त्यांच्या दोन दशकांच्या कारकिर्दीत त्यांना भारतीय संगीताला नवी ओळख दिल्याचे श्रेय दिले जाते.
संगीतबद्ध चित्रपट
[संपादन]हिंदी चित्रपट
[संपादन]विदेशी चित्रपट
[संपादन]- वॉरियर्स ऑफ हेवन अँड अर्थ - २००४
- एलिझाबेथ - २००७
- स्लमडॉग मिलियोनेर - २००८
तमिळ चित्रपट
[संपादन]| अनुक्रम | चित्रपटाचे नाव | संगीत क्षेत्रातील कामगिरी | पुरस्कार |
|---|---|---|---|
| १ | रोजा | ए.आर. रहमान यांचा पहिला चित्रपट; संगीताने भारतीय चित्रपटसृष्टीत क्रांती घडवली. | राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार (सर्वोत्कृष्ट संगीत दिग्दर्शक) |
| २ | पुदिय मुगम | 'कन्नुकु मयी अळगु' सारखी गाणी अत्यंत लोकप्रिय झाली. | — |
| ३ | जंटलमन | 'चिकू बुकू रायेले' गाण्याने तरुणाईत प्रचंड लोकप्रियता मिळवली. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| ४ | किळिक्कु चीमायिले | ग्रामीण पार्श्वभूमीच्या संगीताचा प्रभावी वापर. | — |
| ५ | उळवन | शास्त्रीय आणि आधुनिक संगीताचा संगम. | — |
| ६ | तिरुडा तिरुडा | जागतिक स्तरावरील संगीताचा प्रभाव असलेल्या गाण्यांसाठी प्रसिद्ध. | — |
| ७ | वन्डिचोलै चिन्रासु | 'सेन्तमिळ नाटु तमिळ' सारखी गाणी प्रसिद्ध. | — |
| ८ | ड्युएट | सॅक्सोफोनचा (Saxophone) मुख्य वाद्य म्हणून केलेला उत्कृष्ट वापर. | तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार |
| ९ | मे मादम | 'मर्गाळी पूवे' सारख्या गाण्यांना शास्त्रीय बैठक लाभली. | — |
| १० | कादलन | 'मुकाबला' गाण्याने संपूर्ण भारतात धुमाकूळ घातला होता. | राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार (सर्वोत्कृष्ट पार्श्वगायक) |
| ११ | पवित्र | 'उयिरुम नीये' हे गाणे आईवरील उत्कृष्ट गीतांपैकी एक मानले जाते. | — |
| १२ | करुत्तम्मा | ग्रामीण भागातील लोकसंगीताचा उत्कृष्ट वापर. | राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार (सर्वोत्कृष्ट पार्श्वगायिका) |
| १३ | पुदिय मनरगळ | नवीन धाटणीच्या संगीताचा प्रयोग. | — |
| १४ | मनिता मनिता | सामाजिक संदेश देणाऱ्या संगीताचा समावेश. | — |
| १५ | बॉम्बे | 'हम्मा हम्मा' आणि 'तू ही रे' (उयिरे) ही गाणी जागतिक स्तरावर गाजली. | फिल्मफेअर पुरस्कार आणि आंतरराष्ट्रीय स्तरावर दाद |
| १६ | इन्दिरा | 'नीला कायगीरदू' सारख्या मेलोडिअस गाण्यांसाठी प्रसिद्ध. | — |
| १७ | मुतु | या चित्रपटाच्या संगीताने जपानमध्येही मोठी लोकप्रियता मिळवली. | तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार |
| १८ | लव्ह बर्ड्स | पाश्चात्य नृत्य संगीताचा (Dance music) प्रभावी वापर. | — |
| १९ | इन्दियन | 'अक्कडा नुक्कडा' आणि 'टेलीफोन मणी' ही गाणी गाजली. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| २० | कादल देसम | 'मुस्तफा मुस्तफा' हे मैत्रीवरील अजरामर गीत याच चित्रपटातील आहे. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| २१ | मी.रोमिओ | उत्तम ठेका असलेल्या डान्स नंबर्ससाठी प्रसिद्ध. | — |
| २२ | अन्तिमन्तारै | ग्रामीण आणि पारंपारिक तमिळ संगीताचा समावेश. | — |
| २३ | मिन्सार कनवु | 'वेन्नेलवे' गाण्याने राष्ट्रीय स्तरावर ओळख मिळवली. | राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार (सर्वोत्कृष्ट संगीत दिग्दर्शक) |
| २४ | इरुवर | १९५० च्या दशकातील शास्त्रीय संगीताचा पुनरुच्चार. | — |
| २५ | रत्चगन | उच्च दर्जाचे ध्वनी मुद्रण आणि भव्य गाण्यांसाठी प्रसिद्ध. | — |
| २६ | मोना लिसा | हलक्या-फुलक्या रोमँटिक गाण्यांचा समावेश. | — |
| २७ | जीन्स | 'अजुबों' गाण्यात जगातील सात आश्चर्यांचे चित्रीकरण आणि संगीताचा मेळ. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| २८ | मुदलवन | 'शकलाका बेबी' गाण्याने तरुणाईला भुरळ घातली. | तमिळनाडू राज्य चित्रपट पुरस्कार |
| २९ | ताज महाल | ग्रामीण प्रेम कथेला साजेसे लोकसंगीत. | — |
| ३० | अलैपायुदे | शहरी प्रेम कथेसाठी दिलेले अत्यंत रोमँटिक संगीत. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| ३१ | कन्डुकोन्डेन कन्डुकोन्डेन | शास्त्रीय रागांवर आधारित गाण्यांसाठी नावाजले गेले. | राष्ट्रीय चित्रपट पुरस्कार (सर्वोत्कृष्ट पार्श्वगायक) |
| ३२ | रिदम | निसर्गाच्या पंचमहाभूतांवर आधारित गाण्यांची संकल्पना. | — |
| ३३ | तेनाली | विनोदी चित्रपटाला साजेसे उत्साही संगीत. | — |
| ३४ | बाबा | अध्यात्म आणि व्यावसायिक संगीताचा संगम. | — |
| ३५ | कादल व्हायरस | आधुनिक काळातील प्रेमावर आधारित गाणी. | — |
| ३६ | परसुराम | ॲक्शन चित्रपटाला साजेसे वेगवान संगीत. | — |
| ३७ | बॉयस | संगीतात तंत्रज्ञानाचा (Synthesizers) मोठा वापर. | — |
| ३८ | एनक्कु २० उनक्कु १८ | तरुणांच्या आवडीचे ट्रेंडी संगीत. | — |
| ३९ | कन्गळाल कैदु सेय | मेलोडिअस आणि भावपूर्ण गाण्यांसाठी ओळखला जातो. | — |
| ४० | आयदु येळुदु | रॉक आणि रॅप संगीताचा प्रभावी वापर. | — |
| ४१ | न्यु | तांत्रिकदृष्ट्या प्रगत आणि बोल्ड संगीताचा प्रयोग. | — |
| ४२ | अन्बे आरुयिरे | नवीन पिढीच्या प्रेमसंबंधांवर आधारित उडत्या चालीची गाणी. | — |
| ४३ | सिल्लनु ओरु कादल | 'मुनबे वा' हे गाणे आजही अत्यंत लोकप्रिय आहे. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| ४४ | वर्लारु | लोकसंगीत आणि शास्त्रीय संगीताचा मेळ. | — |
| ४५ | गुरू | 'तेरे बिना' (तेरे इरुक्कम) सारख्या गाण्यांनी जादुई वातावरण निर्माण केले. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| ४६ | सिवाजी द बॉस | मोठ्या प्रमाणावर ऑर्केस्ट्राचा वापर केलेली गाणी. | — |
| ४७ | अळगीय तमिळ मगन | संगीतात नाविन्यपूर्ण रिदमचा वापर. | — |
| ४८ | सक्करकट्टि | 'मन्मदने' गाण्याने प्रसिद्धी मिळवली. | — |
| ४९ | विनैत्तांडि वरुवाया | आधुनिक तमिळ चित्रपटांमधील सर्वोत्तम रोमँटिक अल्बमपैकी एक. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| ५० | अशोकवनम | शास्त्रीय मुळांशी जोडलेले संगीत. | — |
| ५१ | एंदिरम | सायन्स फिक्शनला साजेसे भविष्यकालीन (Futuristic) संगीत. | फिल्मफेअर पुरस्कार (तमिळ) |
| ५२ | द नाईन्टिन्थ स्टेप | आंतरराष्ट्रीय सहकार्य आणि वाद्यांचा प्रयोग. | — |
तेलुगु चित्रपट
[संपादन]- ग्यांग मास्टर्
- सूपर पोलीस
- निप्पु रव्व
- अडवि राणि
- रक्षकुडु
- नी मनसु नाकु तेलुसु
- नानी
बाह्य दुवे
[संपादन]- अधिकृत संकेतस्थळ
- इंटरनेट मुव्ही डेटाबेस वरील ए.आर. रहमान चे पान (इंग्लिश मजकूर)