श्रीमाताजी - स्वत:विषयी (पुस्तक)
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श्रीमाताजी (स्वतःविषयी) हे पुस्तक 'द मदर ऑन हरसेल्फ' या पुस्तकाचा अनुवाद आहे. श्रीमती विमल भिडे यांनी हा अनुवाद केला आहे.
| श्रीमाताजी (स्वत:विषयी) | |
| लेखक | श्रीमाताजी |
| मूळ शीर्षक (अन्य भाषेतील असल्यास) | The Mother on herself |
| अनुवादक | विमल भिडे |
| भाषा | इंग्रजी-मराठी |
| देश | भारत |
| साहित्य प्रकार | आत्मपर लेखन |
| प्रकाशन संस्था | श्रीअरविंद आश्रम |
| प्रथमावृत्ती | १९७९ |
| चालू आवृत्ती | २००९ |
| मालिका | श्रीमातृ-जन्म-शताब्दी ग्रंथमाला (पुष्प पहिले) |
| पृष्ठसंख्या | १३३ |
| आय.एस.बी.एन. | 978-81-7058-908-2 |
आशय
[संपादन]या पुस्तकाचे दोन विभाग आहेत.
पहिल्या विभागात श्रीमाताजींनी लिहिलेले आत्मकथनपर उतारे आहेत. दुसऱ्या विभागात त्यांच्या काही आठवणी, प्रसंग, घटना वर्णन केलेल्या आहेत.
पुस्तकाच्या शेवटी श्रीमाताजींच्या जीवनाचा कालपट देण्यात आलेला आहे.[१]
संदर्भ
[संपादन]- ↑ श्रीमाताजी (स्वत:विषयी), श्रीअरविंद आश्रम, १९७९
