पहिला राजराज चोळ
Appearance
| सम्राट राजराजा चोळ | ||
|---|---|---|
| राजकेसरी वर्मन, पोन्नियिन सेल्वन, मममुटी कोन, शिवपथसेकरन, थिरुमुराई कांडा चोल , तैला कुल कालन, तेलंगू कुल कालन, पांडिया कुल सानी, केरलंधागन , सिंहलंधगन , कृष्णात्री | ||
| बृहदीश्वर मंदिरात राजाराजा I चे भित्तिचित्र | ||
| चोळ साम्राज्य | ||
| अधिकारकाळ | इ.स. ९८५ – इ.स. १०१४ | |
| अधिकारारोहण | सम्राट पदाभिषेक | |
| राज्याभिषेक | इ.स. ९८५ | |
| राजधानी | तंजावर | |
| पूर्ण नाव | अरुल मोझी वर्मन | |
| जन्म | इ.स. ९४७ | |
| तंजावर, तमिळनाडू | ||
| मृत्यू | इ.स. १०१४ | |
| तंजावर, तमिळनाडू | ||
| पूर्वाधिकारी | उत्तम चोळ | |
| उत्तराधिकारी | पहिला राजेंद्र चोळ | |
| वडील | दुसरा परंतक चोळ | |
| आई | वनवन महादेवी | |
| पत्नी | थिरीपुवना महादेवियार लोकमहादेवी चोलमहादेवी तिरिलोक्यमाहादेवी पंचवनमहादेवी अभिमानवल्ली लतामहादेवी पृथ्वीमहादेवी | |
| संतती | राजेंद्र पहिला अरैयान राजाराजन अरुलमोळी चंद्रमल्ली उर्फ गंगामादेवी माथेवादिगल | |
| राजघराणे | चोळ साम्राज्य | |
| धर्म | हिंदू धर्म | |
पहिला राजराज चोळ हा दक्षिण भारतातील चोळ साम्राज्याचा कर्तबगार राज्यकर्ता होता. याने इ.स. ९८५ ते इ.स. १०१४ या काळात राज्यकारभार सांभाळून चोळ राज्याचे साम्राज्य होण्यात मोठा हात भार लावला. याच्या काळात चोळ साम्राज्याने श्रीलंंका, पूर्व भारत, मगध, आजचा आधुनिक बंगाल, ओडिशा, म्यानमार आणि थायलंडचे काही भाग, आणि मलेशिया, इंडोनेशिया या प्रदेशांवर नियंत्रण मिळवले. बहुधा पहिला राजराज चोळ व त्यानंतरचे चोळ राज्यकर्ते हे एकमेव भारतीय राज्यकर्ते होते ज्यांनी साम्राज्यवादी धोरण स्वीकारले होते व त्यासाठी भारताबाहेरील प्रदेशावर आक्रमणे केली. मालदीव बेटे हे त्यापैकी एक. पहिला राजराज चोळ याने त्याच्या काळात अनेक प्रसिद्ध व महाकाय दक्षिण भारतीय मंदिरांची निर्मिती केली.