समर्थकृत देवी स्तोत्रे

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१)रामवरदायिनी श्रीतुळजाभवानी माता

प्रपंची आमुचे कुळी। तुळजा कुलदेवता।

नेणता ऐकिले होते। जाणता स्मरले मनी।

उदंड ऐकिले होते। रामासी वरू दिधला।

मी दास रघुनाथाचा। मजही वरदायिनी।

एकची मागणे आता। द्यावे ते मज कारणे।

तुझा तू वाढवी राजा। शीघ्र आम्हासी देखता।

दुष्ट संहारिले मागे। ऐसे उदंड ऐकतो।

परंतु रोकडे काही। मूळ सामर्थ्ये दाखवी।

रामदास म्हणे माझे। सर्व आतुर बोलणे।

श्री तुळजे माते। इच्छा पूर्ण ची ते करी।।


२)आदिशक्ती

कुमारी शारदा देवी | सुंदरा गायनी कळा |

हंसासनी चतुर्भुजा | वीणा पुस्तक नेटके || १ ||

ब्रह्मी जाली जगजोती | ब्रह्मसुता म्हणोनिया |

ब्रह्मसुता वेदमाता | वेद तेथून जाहाले || २ ||

जाणीव म्हणजे देव्या | जाणता देव बोलिजे |

सीवशक्ती रत्नजोती | वेगळी करितां न ये || ३ ||

सीवशक्ती बहुरूपा | नामरूपी विलासते |

दिसते नासते काया | माया ते अंतरी वसे || ४ ||

ब्रह्मांडीची मूळमाया | पींडीची जाणिजे परा |

परा ते मूळमाया ते | वेदमाता म्हणोनिया || ५ ||


३)आदिशक्ती

मायची माय तीची हि | जन्ननी मात्रु जन्ननी | माता माता तीची माता | वोली हे लांबली बहू || १ ||

माया माया बहु माया | मूळमाया मुळी असे | जगाची मुळीची माता | जगन्माता म्हणोनिया || २ ||

त्रैलोकी समस्तां माता | आंडजारजादिका | सर्वांच्या लांबल्या वोळी | पाहो जातां मुळाकडे || ३ ||

जगन्माता जगत्पिता | सीवशक्तीच जाणिजे | शक्ती ते शक्ती जाणावी | सीवशक्ती सदा वसे || ४ ||

शक्ती दोहीकडे आहे | सामर्थ्य याच कारणे | त्रैलोकी सर्वही देहे | शक्तीवीण अशक्त ते || ५ ||

सर्वांची पाळिली कुळे | कुळदेव्या म्हणोनिया | दासांची शक्ती दासाला | बोलिली कृपाळू पणे || ६ ||


४)आदिशक्ती

वसे मुख्य नेत्री तथा शब्द श्रोत्री |सदा सर्व गात्री दिसे प्राणीमात्री | पहा एकतंत्री फिरे देह्यत्री |जगज्योती हिंडे कुपात्री सुपात्री || १ ||

पहा तर्कशास्त्री पहा न्यायशास्त्री |पहा शिल्पीशास्त्री पहा सर्व शास्त्री | पहा मंत्रयंत्री पहा सूत्रमात्री |पहा मूळमंत्री अरत्री परत्री || २ ||

पहा वेदशास्त्री पहा शास्त्रमात्री |पहा कीर्तिमात्री पहा काव्यमात्री || पहा ग्रंथमात्री पहा लोकमात्री |पहा शब्दमात्री सुचीत्री विचीत्री || ३ ||

कुवर्नी सुवर्णी पहा वर्णवर्णी |आकर्णि विकार्नी च कर्णोपकर्णी | कितीयेक धरणी किती वृक्षपर्णी |बहु जीव ते दाटले व्योमतरणी || ४ ||

समस्तांसी कर्णे समस्तांसी धरणे |समस्तांसी हर्णे समस्तां विवर्णे | जगज्जोतीने राखिले आपणासी |म्हणे दास हे सौख्यरासी विलासी || ५ ||

५)आदिशक्ती

जगदात्मा जगदेश्वरी | परमात्मा परमेश्वरी | उमा लक्ष्मी गाईत्री | सावित्री ते ईंद्रायीणी ||१ ||

अहिल्या द्रौपदी सीता | तारा मंदोदरी दरी | दमंती दुसरी तारा | गंगा भागीरथी उखा || २ ||

नाना प्रकृतीची नामे | पुलोमा रेणुका उखा | स्वर्गस्ता किनारी कोपी | गन्धर्वी गायनी कळा || ३ ||

देव रुसी मुनी योगी | ज्ञानीभक्त बहुविधा | नारदू तुंबरादिक | धृव प्रल्हाद आंबॠषी || ४ ||

उपमन्या अन्य नामे | भक्त मुक्त माहां तपी | सर्व संग परीत्यागी | आगमी अघोरी हटी || ५ ||

दंडधारी जटाधारी | आघारी भस्मलेपनी | विलेपने सुगंधे नाना | अष्टभोग विलासती|| ६ ||

सारंग नौरंग नाना | मानामाने स्वरास्वरे | ताळ प्रबंदाचे गाणे | नाचणे वाद्य सर्वही || ७ ||

सिद्धची सर्वही आहे | उमा रमा विलसती| पूजिती तुळजामाता | सदा आनंद गोंधळी || ८ ||

त्रैलोक्य पुजनासाठी | वाढती मोडती किती| राम वर्दायीनी माता | हे माझी कुलस्वामिनी || ९ ||

पाळितो सर्वही क्षेत्रे | बंधू तो क्षेत्रपाल हा | विखार चीर्डीले सर्वै | कालसर्प परोपरी || १० ||


६) श्रीदेवी आदिकर्ती तुळजा भवानी

सदा आनंदभरित | रंगसाहित्य संगीत || १ ||

जगदात्मा जगदेश्वरी | जगज्जोती जगदोध्दारी || २ ||

जिच्या वैभवाचे लोक | हरिहर ब्रह्मादिक || ३ ||

बहु राजे राजेश्वर | सर्व तुझेची किंकर || ४ ||

वसे आकाशी पाताळी | सर्वकाळी तिन्हीताळी || ५ ||

सर्व देह हालविते | चालविते बोलविते || ६ ||

मूळमाया विस्तारली | सिद्धसाधकांची बोली || ७ ||

शक्ति सर्वांगे व्यापिली | शक्ती गेली काया मेली || ८ ||

होते कोठून उत्पत्ति | भगवति भगवति || ९ ||

सुख तीवाचूनि नाही | न लगे अनुमान काही || १० ||

जाली माता मायराणी | भोग नाही ती वाचुनि || ११ ||

भूमंडळींच्या वनिता | बाळ तारुण्य समस्ता || १२ ||

जगजीवनी मनमोहिनी | जिवलगाची त्रिभुवनी || १३ ||

रूप एकाहुनी एक | रम्य लावण्य नाटक || १४ ||

पाहा एकाची अवयव | भुलविले सकळ जीव || १५ ||

मन नयन चालवी | भगवती जग हालवी || १६ ||

भोग देते भूमंडळी | परि आपण वेगळी || १७ ||

योगी मुनिजन ध्यानी | सर्व लागले चिंतनी || १८ ||

भक्ती मुक्ती युक्ती दाती | आदिशक्ती सहज स्थिती || १९ ||

सतरावी जीवनकळा | सर्व जीवांचा जिव्हाळा || २० ||

मुळी रामवरदायिनी | रामदास ध्यातो मनी || २१ ||