लिंगायत धर्म

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वीरशैव पंथ दर्शन[संपादन]

वीरशैव पंथ एक ऐसी परम्परा है जिसमें भक्त शिव परम्परा से बन्धा हो । यह दक्षिण भारत में बहुत लोकप्रिय हुई है। ये वचन साहित्य पर आधारित धर्म है, ये भारत का तीसरा सबसे बड़ा धर्म है पर इसके ज़्यादातर उपासक कर्नाटक में हैं और भारत का दक्षिण राज्यो महाराष्ट्र आंद्रप्रदेश केरला ओर तमिलनाड मे उपासक अदिक्तम है । ये एकेश्वरवादी धर्म है। तमिल में इस को शिवाद्वैत धर्म अथवा विरशैव धर्म भी कहते हैं।

४ धर्मग्रन्थ ४ वीरशैव संस्कृति ६.१ वैदिक काल और यज्ञ ६.२ तीर्थ एवं तीर्थ यात्रा ६.३ मूर्तिपूजा ६.४ मंदिर ६.५ शाकाहार ६.६ भक्त

इतिहास :[संपादन]

१२वि शताब्दि गुरु बसवॆष्वर लिंगायत धर्म श्थापित किया है।

मुख्य सिद्धान्त[संपादन]

लिंगायत धर्म, षटस्थल सिद्धान्त है जिसे सभी लिंगायत को मानना ज़रूरी है । ये तो एक अध्यात्म साधन का मार्ग है । बसवादि शरण साम्प्रदाय ह,

इष्टलिंग[संपादन]

अष्टावर्ण[संपादन]

  1. गुरु : लिंगायत साम्प्रदाय में गुरु को शिव का प्रति रूप माना जाता है। शिष्य की उद्धरण
               के लिये गुरु मु़ख्य है ओर शिष्य को धर्म मार्ग पर चलाते है।
  1. लिंगः शिव प्रति रूप यनि विश्वात्मका साकार रूप हि लिंग है । लिंगमे त्रि प्रकार है
              १) इष्टलिंग २)चरलिंग ३) स्थावरलिंग । इष्टलिंग को  धर्म उपासकोने कंठमे
                धारण क‍रते है । 
  1. जंगम : लिंगायत साम्प्रदाय में जंगमो को सबसे उंचा स्थान है
              ओर इनका कर्तव्य हिन्दू धर्मं का प्रचार, लोककल्याण, धर्मं पौरोहित्य, वेदाभ्यास, अध्ययन, अध्यापन करना है ।  
             जंगम ही प्राचीन काल के शैव ब्राह्मण है । जंगम और शैवब्राह्मण एक ही है । जंगम, लिंगायत साम्प्रदाय के अध्यात्मिक और सामाजिक गुरु है ।
  1. पादोदक : यनि गुरु की चरण को धोये पानी अचमन
  2. प्रसादः : शिवलिंगार्पि नविद्य सेवन
  3. विभूती : यनि भस्म से माथे प‍र त्रीपुंड धारण करते है वीरशैव
  4. रुद्राक्षि : शिखा,मस्तक,कंट,गळा,करण,ओर् रुद्राक्षि से मुकुट बनाके
                धारण करते है वीरशैव 
  1. मंत्र : ओम नमः शिवाय पंचाक्षरि जप

षटस्थल[संपादन]

१ भक्तस्थल २ महेशस्थल ३ प्राणस्थल ४ लिंगस्थल ५ ऐक्यस्थल ६ शरणस्थल


पंचाचार :[संपादन]

१ भर्त्याचार,२लिंगाचार,३सदाचार,४गणचार ,५& शिवाचार

धर्मग्रन्थ :[संपादन]

वचन साहित्य

शाकाहार[संपादन]

सबि लिंगायतको शाकाहारी होना ज़रूरी है। मांस ,मद्य, परस्त्रिअगमन निषेध है।

स्मृति इतिहास[संपादन]

वर्षभेंद्र विजय, और प्रभुलिंगलिला, पेरिय पुराण ,वचन ,शैव काव्य


विचार अवतार[संपादन]

आत्मा · जंगम · धर्म · कर्म · मोक्ष · पंचाचार · शिव · लिंग· · संसार · तत्त्व · अष्टावर्ण· कृतार्थ · गुरु

दर्श

मान्यता[संपादन]

प्राचीन वीरशैव धर्म · भक्तस्थल · महेशस्थल · लिंगस्थल · प्राण्स्थल ·शरणस्थल · जंगमस्थल · साँचा:वीरशैव दर्शन

परम्परा ज्योतिष · आयुर्वेद · आरती · भजन · दर्शन · दीक्षा · मन्त्र · पूजा · सत्संग · स्तोत्र · विवाह · लिंगधारण · जंगमदान

लिंगायत संस्कार[संपादन]

इष्टलिंग दिक्शा संस्कार


गुरु[संपादन]

बसवेश्वर अल्लमप्रभु सिद्धरामेश्वर उमापति शिवाचार्य चन्नबसव वागिश पंडिताराध्य शिवाचार्य सिद्धेश्वर स्वामी शिवकूमार स्वामी डा॥ चंद्रशेखर शिवाचार्य


लिंगायत क्षेत्र :[संपादन]

· कुडलसंगम, बसव कल्याण, सोलापूर, उळवि, श्रीशैल


वर्गःभाषांतर