महादेवी वर्मा
| महादेवी वर्मा | |
|---|---|
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| जन्म |
मार्च २७, १९०७ फरुखाबाद जिल्हा, उत्तर प्रदेश, भारत |
| मृत्यू |
सप्टेंबर ११, १९८७ अलाहाबाद, उत्तर प्रदेश, भारत |
| राष्ट्रीयत्व |
भारतीय |
| कार्यक्षेत्र | हिंदी साहित्य |
| भाषा | हिंदी |
| साहित्य प्रकार | कविता |
| कार्यकाळ | विसावे शतक |
| चळवळ | छायावाद |
| प्रसिद्ध साहित्यकृती | यामा (कवितासंग्रह) |
| आई | हेमरानी देवी |
| पती | डॉ.स्वरूप नारायण वर्मा |
| पुरस्कार |
ज्ञानपीठ पुरस्कार(१९८२) पद्मभूषण (१९५६) पद्मविभूषण (१९८८) |
महादेवी वर्मा( जन्म :मार्च २७, १९०७ - - सप्टेंबर ११, १९८७) हिंदीतील अत्यंत प्रतिभावान कवयित्री होत्या. त्यांना हिंदी साहित्य जगतातील छायावादी युगाच्या चार प्रमुख स्तंभांपैकी एक समजले जाते. आधुनिक हिंदीच्या समर्थ कवीं असल्यामुळे त्यांना 'आधुनिक मीरा' पण म्हंटले जाते. कवी निराला ह्यांनी तर त्यांचा हिंदीच्या विशाल मंदिरातील सरस्वती असा उल्लेख केला आहे.
प्रतिभावान कवयित्री व गद्य लेखिका महादेवी वर्मा संगीतातपण निपुण होत्या. त्याचबरोबर कुशल चित्रकार व सृजनात्मक अनुवादक पण होत्या. त्यांना हिंदी साहित्यातील सगळ्याच मोठ्या पुरस्कारांनी गौरविले गेले होते.
जन्म व शिक्षण
[संपादन]महादेवींचा जन्म २७ मार्च १९०७ला भारताच्या उत्तर प्रदेश राज्यातील एका गावात झाला. त्यांचे प्राथमिक शिक्षण इंदुरातल्या मिशन शाळेत सुरू झाले. बरोबरच संस्कृत, इंग्रजी, संगीत आणि चित्रकलेचे शिक्षण शिक्षक घरी येऊन देत असत. १० वी वर्गात शिकत असतांनाच त्याचा निहार पहिला काव्यसंग्रह प्रकाशित झाला. १९१९ मध्ये अलाहाबादमधल्या क्रास्थवेट कॉलेजात प्रवेश घेऊन हुशार व मेधावी विद्यार्थिनीच्या रूपात पुढे जात जात त्या १९३२ मध्ये अलाहाबाद विश्वविद्यालयातून संस्कृत विषयात एम.ए. झाल्या. बंगाली, मराठी, गुजराती, इंग्रजी भाषा त्यांना उत्तम अवगत होत्या.[१]
कार्यक्षेत्र
[संपादन]महादेवींचे कार्यक्षेत्र लेखन, संपादन व अध्यापन होते. अलाहाबादच्या प्रयाग महिला विद्यापीठाच्या विकासकार्यात त्यांचा मोठा सहभाग होता. त्या काळात हे काम म्हणजे महिला क्षेत्रात क्रांती घडविणारे पाऊल होते. ह्या विद्यापीठाच्या त्या प्रधानाचार्य व कुलगुरू पण होत्या.१९३२ मध्ये त्यांनी चॉंद नावाच्या एका महिलांच्या मासिकाच्या मुख्य संपादक झाल्या. कविता, निबंध, ललित लेखन, व्यक्तिचित्रण असे विविध प्रकारचे लेखन महादेवीनी केले.
महादेवी वर्मा यांचे साहित्य
[संपादन]| पुस्तक | साहित्याचा प्रकार | प्रकाशन वर्ष | पुरस्कार / विशेष नोंद |
|---|---|---|---|
| अग्निरेखा | पद्य साहित्य | १९९० | |
| आत्मिका | पद्य साहित्य | — | |
| आधुनिक कवि महादेवी | पद्य साहित्य | — | |
| गीतपर्व | पद्य साहित्य | — | |
| दीपगीत | पद्य साहित्य | — | |
| दीपशिखा | पद्य साहित्य | १९४२ | |
| नीरजा | पद्य साहित्य | १९३४ | सेक्सरिया पुरस्कार (१९३४) |
| नीलांबरा | पद्य साहित्य | — | |
| नीहार | पद्य साहित्य | १९३० | महादेवी वर्मा यांचा पहिला कवितासंग्रह |
| परिक्रमा | पद्य साहित्य | — | |
| प्रथम आयाम | पद्य साहित्य | १९७४ | |
| यामा | पद्य साहित्य | १९३६ | ज्ञानपीठ पुरस्कार (१९८२) आणि मंगलाप्रसाद पारितोषिक |
| रश्मि | पद्य साहित्य | १९३२ | |
| सप्तपर्णा | पद्य साहित्य (अनुवादित) | १९५९ | ऋग्वेदातील मंत्रांचा काव्यानुवाद |
| संधिनी | पद्य साहित्य | १९६५ | |
| सांध्यगीत | पद्य साहित्य | १९३६ | |
| स्मारिका | पद्य साहित्य | — | |
| अतीत के चलचित्र | गद्य साहित्य | १९४१ | रेखाचित्र संग्रह |
| मेरा परिवार | गद्य साहित्य | १९७२ | संस्मरण संग्रह (प्राणी आणि पक्ष्यांवर आधारित) |
| संभाषण | गद्य साहित्य | १९७४ | भाषणांचा संग्रह |
| संस्मरण | गद्य साहित्य | १९८३ | संस्मरण संग्रह |
| संस्मरण: पथ के साथी | गद्य साहित्य | १९५६ | समकालीन लेखकांचे संस्मरण |
| स्मृति की रेखाएॅं | गद्य साहित्य | १९४३ | रेखाचित्र संग्रह (द्विवेदी पदक) |
| विवेचनात्मक गद्य | वैचारिक लेखसंग्रह | १९४२ | |
| शृंखला की कड़ियॉं | वैचारिक लेखसंग्रह | १९४२ | स्त्री मुक्ती आणि हक्कांवर आधारित निबंध |
| संकल्पिता | वैचारिक लेखसंग्रह | १९६९ | |
| साहित्यकार की आस्था व निबंध | वैचारिक लेखसंग्रह | १९६२ | |
| क्षणदा | ललित निबंध | १९५६ | |
| गिल्लू | कथासंग्रह | — | 'मेरा परिवार' मधील खारुताईवर आधारित प्रसिद्ध कथा |
| हिमालय | आठवणी | १९६३ | संपादन संग्रह |
| आज ख़रीदेंगे हम ज्वाला | बाल कवितासंग्रह | — | |
| ठाकुरजी भोले हैं | बाल कवितासंग्रह | — |
पुरस्कार व सन्मान
[संपादन]महादेवी वर्मांना प्रशासनिक, अर्धप्रशासनिक व व्यक्तिगत अशा सगळ्याच संस्थांकडून सन्मानित केले आहे. भारतीय स्वातंत्र्य प्राप्तीनंतर १९५२ मधे उत्तर प्रदेश विधान परिषदेत त्यांना सदस्य बनविले. १९५६ मधे भारत सरकारने त्यांच्या साहित्यिक सेवेसाठी त्यांना पद्मभूषण ही उपाधी दिली.. १९७९ मधे त्या साहित्य ॲकॅडमीच्या पहिल्या महिला सदस्य होत. भारत सरकार कडून १९८८ मधे त्यांना मरणोपरान्त पद्मविभूषण देऊन भूषविले. भारत-भारती हे पुरस्कार त्यांना मिळाले. १९८३ मध्ये यात्रा या काव्यसंग्रहाला ज्ञानपीठ पुरस्कार मिळाला.
सन १९६९ मधे विक्रम विश्वविद्यालय, १९७७ मधे कुमाऊॅं विश्वविद्यालय (नैनीताल), १९८० मधे दिल्ली विश्वविद्यालय आणि १९८४ मधे बनारस हिंदू विश्वविद्यालय या संस्थांनी त्यांना डी.लिट. ही उपाधि देऊन सन्मानित केले. ह्या आधी महादेवी वर्मांना 'नीरजा' साठी १९३४ मधे 'सक्सेरिया पुरस्कार, १९४२ मधे 'स्मृति की रेखाएॅं' साठी 'द्विवेदी' पदक मिळाले. 'यामा' नामक काव्य संकलनासाठी त्यांना भारत सरकारचा सर्वोच्च सन्मान 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' देण्यात आला.
त्या भारतामधील ५० यशस्वी महिलांमधील एक होत.
१९६८ मधे सुप्रसिद्ध चित्रपट निर्माते मृणाल सेन ह्यांनी त्यांच्या स्मरणार्थ 'वह चीनी भाई' वर 'नील आकाशेर नीचे' नामक एक बंगाली चित्रपटाची निर्मिती केली. १६ सप्टेंबर १९९१ला भारत सरकारने महादेवी वर्मांच्या सन्मानार्थ जयशंकर प्रसादांसमवेत २ रुपयांचे एक पोस्टाचे तिकीट प्रकाशित केले. त्यांच्या अतीत के चलचित्र या पुस्तकाचा मराठी अनुवाद’ ’बिंदा, सांबिया आणि... ’या नावाने प्रकाशित झाला आहे.
बाह्य दुवे
[संपादन]संदर्भ व नोंदी
[संपादन]- ↑ कर्वे, स्वाती (१५ ऑगस्ट २०१२). १०१ कर्तुत्ववान स्त्रिया. पुणे: उत्कर्ष प्रकाशन. pp. ११६. ISBN 978-81-7425-310-1.
