पाकीझा
1972 film by Kamal Amrohi | |||
| माध्यमे अपभारण करा | |||
| प्रकार | चलचित्र | ||
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| मुख्य विषय | prostitution | ||
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पाकीझा (अर्थ: पवित्र) हा १९७२ चा भारतीय संगीतमय प्रण्य-नाट्यपट आहे जो कमल अमरोही यांनी लिहिलेला, दिग्दर्शित केलेला आणि निर्मित केलेला आहे. या चित्रपटात मीना कुमारी यांच्यासोबत अशोक कुमार आणि राज कुमार हे प्रमुख भूमिकेत आहेत.[१][२]
लखनौ येथील तवायफ साहिबजानची कहाणी आहे; ट्रेनमध्ये झोपलेले असताना, साहिबजानला एका अनोळखी व्यक्तीकडून तिच्या सौंदर्याची प्रशंसा करणारी एक चिठ्ठी मिळते. नंतर तिला सलीम भेटतो ज्याने ते पत्र लिहीले होते; व तो एक वनरक्षक आहे. पण साहिबजानच्या व्यवसायामुळे त्यांच्या लग्नात अडथळे येतात.
अमरोही, ज्यांच्याशी कुमारी विवाहित होती, त्यांना त्यांच्या पत्नीला समर्पित एक चित्रपट बनवायचा होता. चित्रपटाची निर्मिती १५ वर्षे चालली. मुख्य छायाचित्रण १९५६ मध्ये जर्मन सिनेमॅटोग्राफर जोसेफ विर्शिंग यांच्या नेतृत्वाखाली सुरू झाले. या चित्रपटात अनेक अडथळे आले, विशेषतः १९६४ मध्ये कुमारी आणि अमरोही यांचे वेगळे होणे आणि कुमारीचे दारूचे व्यसन, ज्यामुळे ती अनेकदा अभिनय करू शकली नाही. अनेक वर्षे पुढे ढकलल्यानंतर, १९६९ मध्ये चित्रीकरण पुन्हा सुरू झाले आणि नोव्हेंबर १९७१ मध्ये पूर्ण झाले. १९७० च्या दशकातील सर्वाधिक विक्री होणाऱ्या बॉलिवूड साउंडट्रॅकपैकी एक बनलेल्या या चित्रपटाच्या साउंडट्रॅकची रचना गुलाम मोहम्मद यांनी केली होती आणि नौशाद यांनी पूर्ण केली होती, ज्यांनी पार्श्वसंगीत देखील तयार केले होते.[३]
१२.५ दशलक्ष (US$२,७७,५००) ते
१५ दशलक्ष (US$३,३३,०००) या बजेटमध्ये बनवलेला चित्रपट ४ फेब्रुवारी १९७२ रोजी प्रदर्शित झाला आणि समीक्षकांकडून त्याला संमिश्र प्रतिसाद मिळाला. निर्मीतीतील उधळपट्टी आणि कथानकाबद्दल टीका झाली. तरीसुद्धा, ५० आठवड्यांहून अधिक काळ थिएटरमध्ये प्रदर्शित झाल्यानंतर तो वर्षातील सर्वाधिक कमाई करणारा हिंदी चित्रपट झाला, ज्याने
६० दशलक्ष (US$१.३३ दशलक्ष) कमाई केली. व्यापार विश्लेषकांचे म्हणणे आहे की त्याची लोकप्रियता प्रदर्शित झाल्यानंतर एका महिन्यानंतर कुमारी यांच्या निधनामुळे झाली असावी. या चित्रपटामुळे तिला सर्वोत्कृष्ट अभिनेत्रीसाठी फिल्मफेर पुरस्कारासाठी नामांकन मिळाले आणि बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट असोसिएशन अवॉर्ड्समध्ये विशेष पुरस्कार मिळाला. चित्रपटाला सर्वोत्कृष्ट चित्रपट आणि सर्वोत्कृष्ट दिग्दर्शक (अमरोही) साठी नामांकन देखील मिळाले आणि एन.बी. कुलकर्णी यांना सर्वोत्कृष्ट कला दिग्दर्शनासाठी फिल्मफेर पुरस्कार मिळाला.
गीत
[संपादन]या चित्रपटाचे साउंडट्रॅक गुलाम मोहम्मद आणि नौशाद यांनी संगीतबद्ध केले होते, तर कैफी आझमी, मजरूह सुलतानपुरी, कमाल अमरोही आणि कैफ भोपाली यांनी गीते लिहिली होती. एकूण २० गाणी रेकॉर्ड करण्यात आली होती, परंतु त्यापैकी फक्त अकरा गाणी चित्रपटात वापरली गेली. उर्वरित नऊ गाणी नंतर १९७७ मध्ये "पाकीझा रंग बरंग" या अल्बम मध्ये प्रदर्शित झाली. १९७२ च्या बिनाका गीतमाला मध्ये चित्रपटातील दोन गाणी - "इनहिन लोगों ने" आणि "चलते चलते" अनुक्रमे #२ आणि #३ स्थानावर राहिली.[४]
| क्र. | गाणे | राग | गायक | गीतकार | संगीतकार | अवधी | |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चित्रपट | १ | थीम | मिश्र पिलू | लता मंगेशकर | - | नौशाद | 4:15 |
| २ | "मोरा साजन" | पहाडी | वाणी जयराम | नौशाद | 2:29 | ||
| ३ | "इन्ही लोगों ने" | यमन कल्याण | लता मंगेशकर | मजरूह सुलतानपुरी | गुलाम मोहम्मद | 3:41 | |
| ४ | "कौन गली गयो" | मश्र खमाज | परवीन सुलताना | कैफी आझमी | नौशाद | 2:41 | |
| ५ | "नजरिया की मारी" | खमाज | राजकुमारी दुबे | -पारंपारिक- | नौशाद | 2:18 | |
| ६ | "थाडे रहियो" | मंद | लता मंगेशकर | कमाल अमरोही, मजरूह सुलतानपुरी | गुलाम मोहम्मद | 5:53 | |
| ७ | "चलते चलते" | भूप कल्याण | लता मंगेशकर | कैफी आझमी | गुलाम मोहम्मद | 5:53 | |
| ८ | "मौसम है आशिकाना" | यमन | लता मंगेशकर | कमाल अमरोही | गुलाम मोहम्मद | 4:53 | |
| ९ | "चलो दिलदार चलो" | पहाडी | मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर | कैफ भोपाली | गुलाम मोहम्मद | 3:37 | |
| १० | "तीर ए नजर" | खमाज | लता मंगेशकर | कैफ भोपाली | गुलाम मोहम्मद | 3:59 | |
| ११ | "ये धुआं सा" | नसिम चोप्रा | मीर ताकी मीर | गुलाम मोहम्मद | 3:05 | ||
| "पाकीझा रंग बरंग" | १२ | "लेके अंगडाई" | मीना कुमारी, सुमन कल्याणपूर | कैफ भोपाली | गुलाम मोहम्मद | 5:09 | |
| १३ | "कोठे से बडा" | शमशाद बेगम | कैफ भोपाली | गुलाम मोहम्मद | 3:25 | ||
| १४ | "हटकर तेरे कदमोंसे" | मोहम्मद रफी, शमशाद बेगम | कैफ भोपाली | गुलाम मोहम्मद | 5:01 | ||
| १५ | "प्यारे बाबूल" | लता मंगेशकर | कैफ भोपाली | गुलाम मोहम्मद | 4:37 | ||
| १६ | "चलो दिलदार चलो" | पहाडी | लता मंगेशकर | कैफ भोपाली | गुलाम मोहम्मद | 3:47 | |
| १७ | "तन्हाई सुनाया करती हैं" | मंद | लता मंगेशकर | कमाल अमरोही | गुलाम मोहम्मद | 3:36 | |
| १८ | "पी के चले" | लता मंगेशकर | मजरूह सुलतानपुरी | गुलाम मोहम्मद | 4:19 | ||
| १९ | येह किसकी आंखोंका" | यमन | मोहम्मद रफी | मजरूह सुलतानपुरी | गुलाम मोहम्मद | 5:21 | |
| २० | "बंधन बांधो" | भूपाळी | शोभा गुर्टू | गुलाम मोहम्मद | 4:19 | ||
संदर्भ
[संपादन]- ↑ Amrohi, Tajdar; Farook, Farhana (8 June 2017). "The truth behind Pakeezah unveiled..." Filmfare. 1 January 2021 रोजी मूळ पानापासून संग्रहित. 20 October 2021 रोजी पाहिले.
- ↑ Banaji, S. J. (25 February 1972). Karanjia, B. K. (ed.). "Pakeezah: No sale!". Filmfare. Vol. 21 no. 4. p. 37. 2 June 2021 रोजी मूळ पानापासून संग्रहित. 6 January 2022 रोजी पाहिले.
- ↑ Sharma, Devesh (6 June 2016). "Seven Muslim socials you must watch". Filmfare. 13 April 2021 रोजी मूळ पानापासून संग्रहित. 6 January 2022 रोजी पाहिले.
- ↑ "100 Songs with Ameen Sayani's Geetmala Vol-5". YouTube. 28 December 2017. Event occurs at 05:02:02. 9 September 2019 रोजी पाहिले.