नील कमल (१९६८ चित्रपट)
| गट-प्रकार | fantasy film, प्रणय चित्रपट |
|---|---|
| प्रकाशन तारीख | 1968 |
| मूळ देश | भारत |
| मूळ भाषा | हिंदी |
| दिग्दर्शक | Ram Maheshwari |
| चित्रीकरण दिग्दर्शक | Fali Mistry |
| संगीतकार | रविशंकर शर्मा |
| वितरक | नेटफ्लिक्स |
| रंग | color |
| वितरण | video on demand |
नील कमल हा १९६८ चा राम महेश्वरी दिग्दर्शित भारतीय हिंदी -भाषेतील रोमँटिक थरारपट आहे. ह्यात वहीदा रेहमान, राज कुमार, मनोज कुमार, मेहमूद, बलराज साहनी, ललिता पवार आणि शशिकला यांच्या प्रमुख भूमिका आहेत.
नील कमलला रिलीज होताच समीक्षकांकडून खूप सकारात्मक प्रतिसाद मिळाला आणि बॉक्स ऑफिसवर तो एक मोठा व्यावसायिक यश ठरला. हा १९६८ चा तिसरा सर्वाधिक कमाई करणारा चित्रपट होता.
१६ व्या फिल्मफेर पुरस्कारांमध्ये, नील कमलला सर्वोत्कृष्ट चित्रपट, सर्वोत्कृष्ट दिग्दर्शक (माहेश्वरी), सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेता (राज कुमार), सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेत्री (शशिकला) आणि सर्वोत्कृष्ट विनोदी कलाकार (मेहमूद) यासह ८ नामांकने मिळाली. वहिदा रेहमानने सर्वोत्कृष्ट अभिनेत्रीचा पुरस्कार जिंकला जो त्यांनी आधी गाईड (१९६५) चित्रपतासाठी पण मिळवला होता.
गीत
[संपादन]नील कमल यांचे गीत रविशंकर शर्मा यांनी संगीतबद्ध केले होते आणि बोल साहिर लुधियानवी यांनी लिहीले होते. मोहम्मद रफी यांनी गायलेल्या "बाबुल की दुआयें लेती जा" या गाण्यासाठी चित्रपट मोठ्या प्रमाणात प्रसिद्ध आहे, जे प्रत्यक्ष बिदाई विधी दरम्यान हिंदी लग्नाचे गाणे म्हणून लोकप्रिय झाले.[१][२]
| क्र | गाणे | गायक | गीतकार |
|---|---|---|---|
| १ | "रोम रोम में बसने वाले राम" | आशा भोसले | साहिर लुधियानवी |
| २ | "आजा तुझको पुकारे मेरा प्यार" | मोहम्मद रफी | साहिर लुधियानवी |
| ३ | "ये जिंदगी जो अब तक थी तेरी" | आशा भोसले | साहिर लुधियानवी |
| ४ | "बाबुल की दुआयें लेती जा" | मोहम्मद रफी | साहिर लुधियानवी |
| ५ | "शर्मा के युं ना देख" | मोहम्मद रफी | साहिर लुधियानवी |
| ६ | "दोनो के विचकार लगता" | आशा भोसले | साहिर लुधियानवी |
| ७ | "खाली डब्बा खाली बोटल" | मन्ना डे | साहिर लुधियानवी |
पुरस्कार आणि नामांकने
[संपादन]- १६ वे फिल्मफेअर पुरस्कार :
जिंकले
नामांकन
- सर्वोत्कृष्ट चित्रपट - पन्नालाल माहेश्वरी
- सर्वोत्कृष्ट दिग्दर्शक - राम माहेश्वरी
- सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेता - राज कुमार
- सर्वोत्कृष्ट सहाय्यक अभिनेत्री - शशिकला
- सर्वोत्कृष्ट विनोदी कलाकार - मेहमूद
- सर्वोत्कृष्ट पार्श्वगायक - मोहम्मद रफी "बाबुल की दुआये"
- सर्वोत्कृष्ट कथा - गुलशन नंदा
संदर्भ
[संपादन]- ↑ "'नील कमल' फिल्म के इस गीत को गाते हुए रोने लगे थे मोहम्मद रफी, सुना तो आप भी हो जाएंगे इमोशनल". १६ जुलै २०२३. ९ जुलै २०२५ रोजी पाहिले.[permanent dead link]
- ↑ "When Mohammed Rafi Cried While Singing This Song From Neel Kamal". १ जुलै २०२३. ९ जुलै २०२५ रोजी पाहिले.