तिसरा इंद्र राष्ट्रकूट
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| सम्राट इंद्र तिसरा | ||
|---|---|---|
| महाराजाधिराज परमेश्वर श्री-पृथ्वी-वल्लभ नित्यवर्ष राजा-मार्थंड रत्ता-कंदरपा कीर्ती-नारायण | ||
| अधिकारकाळ | इ.स. ९१४ - इ.स. ९२९ | |
| अधिकारारोहण | सम्राट पदाभिषेक | |
| राज्याभिषेक | २४ फेब्रुवारी इ.स. ९१५ | |
| राजधानी | मान्यखेट | |
| पूर्ण नाव | इंद्र तिसरा | |
| मान्यखेट, राष्ट्रकुट साम्राज्य | ||
| मृत्यू | इ.स. ९२९ | |
| मान्यखेट, राष्ट्रकुट साम्राज्य | ||
| पूर्वाधिकारी | दुसरा कृष्ण राष्ट्रकूट | |
| उत्तराधिकारी | दुसरा अमोघवर्ष | |
| वडील | जगत्तुंगा | |
| आई | राजकुमारी लक्ष्मी | |
| पत्नी | विजंबा | |
| संतती | दुसरा अमोघवर्ष चौथा गोविंद राष्ट्रकूट | |
| राजघराणे | राष्ट्रकुट | |
| धर्म | जैन धर्म | |
इंद्र तिसरा(914-929 CE) हा राष्ट्रकूट कृष्ण II चा नातू आणि चेडी राजकुमारी लक्ष्मीचा मुलगा होता. वडील जगत्तुंगाच्या लवकर निधनामुळे तो साम्राज्याचा शासक बनला. त्याला नित्यवर्ष, रत्तकंदरापा, राजमरथंड आणि कीर्तिनारायण अशा अनेक पदव्या होत्या. त्यांनी कन्नड कवी आणि सेनापती श्रीविजया आणि संस्कृत कवी त्रिविक्रम यांचे संरक्षण केले. इंद्र तिसऱ्याचा विवाह मध्य भारतातील कलचुरी घराण्यातील राजकन्या विजांबाशी झाला होता
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