गुरूनाथ आबाजी कुलकर्णी
गुरुनाथ आबाजी कुलकर्णी ऊर्फ जी. ए. कुलकर्णी (जुलै १०, इ.स. १९२३ - डिसेंबर ११, इ.स. १९८७) हे मराठी लेखक, कथाकार होते.
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जीवन [संपादन]
गुरुनाथ आबाजी कुलकर्णी यांचा जन्म जुलै १०, इ.स. १९२३ रोजी झाला. त्यांचे बहुतेक आयुष्य धारवाड येथे गेले. त्यांनी धारवाडच्या जे. एस. एस. महाविद्यालयामध्ये इंग्लिश भाषाचे अध्यापन केले. ते वैयक्तिक आयुष्यात अबोल व प्रसिद्धीविन्मुख मानले जातात. त्यांचे निधन डिसेंबर ११, इ.स. १९८७ रोजी झाले.
प्रकाशित साहित्य [संपादन]
जी. ए. कुलकर्णींच्या काही कथा सुरुवातीस सत्यकथा नियतकालिकात प्रसिद्ध झाल्या. त्यांचे सर्व कथासंग्रह व इतर साहित्य खालीलप्रमाणे आहे:
| शीर्षक | साहित्यप्रकार | प्रकाशक | प्रकाशनवर्ष (इ.स.) | भाषा |
|---|---|---|---|---|
| निळासावळा | कथासंग्रह | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | १४ जानेवारी, इ.स. १९५९ | मराठी |
| पारवा | कथासंग्रह | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | सप्टेंबर, इ.स. १९६० | मराठी |
| हिरवे रावे | कथासंग्रह | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | सप्टेंबर, इ.स. १९६२ | मराठी |
| रक्तचंदन | कथासंग्रह | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | सप्टेंबर, इ.स. १९६६ | मराठी |
| काजळमाया | कथासंग्रह | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | इ.स. १९७२ | मराठी |
| रमलखुणा | कथासंग्रह | काँटिनेंटल प्रकाशन, पुणे | जून, इ.स. १९७५ | मराठी |
| सांजशकुन | कथासंग्रह | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | इ.स. १९७५ | मराठी |
| पिंगळावेळ | कथासंग्रह | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | इ.स. १९७७ | मराठी |
| कुसुमगुंजा | कथासंग्रह | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई[१] | १० जुलै, इ.स. १९८९ | मराठी |
| डोहकाळिमा[२] | कथासंग्रह | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | इ.स. १९८७ | मराठी |
| सोनपावले | कथासंग्रह | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | ११ डिसेंबर, इ.स. १९९१ | मराठी |
| मुग्धाची रंगीत गोष्ट | बाल-किशोरसाहित्य | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | २६ नोव्हेंबर, इ.स. १९८६ | मराठी |
| बखर बिम्मची | बाल-किशोरसाहित्य | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | २६ नोव्हेंबर, इ.स. १९८६ | मराठी |
| माणसे-अरभाट आणि चिल्लर | आत्मचरित्रपर ललितलेखन | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | ११ मार्च, इ.स. १९८८ | मराठी |
| अमृतफळे | अनुवादित कथा[३] | काँटिनेंटल प्रकाशन, पुणे | इ.स. १९८० | मराठी |
| ओंजळधारा | काँटिनेंटल प्रकाशन, पुणे | इ.स. १९८१ | मराठी | |
| पैलपाखरे | कथासंग्रह (चार अनुवादित दीर्घकथा) |
परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | १० जुलै, इ.स. १९८६ | मराठी |
| आकाशफुले | कथासंग्रह (अनुवादित, रुपांतरित, आधारित कथा) |
परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | २९ सप्टेंबर, इ.स. १९९० | मराठी |
| स्वातंत्र्य आले घरा | अनुवादित कादंबरी | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | ३० जून, इ.स. १९६८ | मराठी |
| रानातील प्रकाश | अनुवादित कादंबरी | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | ३० जुलै, इ.स. १९६८ | मराठी |
| रान | अनुवादित कादंबरी | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | इ.स. १९६७ | मराठी |
| शिवार | अनुवादित कादंबरी | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | इ.स. १९६८ | मराठी |
| गाव | अनुवादित कादंबरी | परचुरे प्रकाशन मंदिर, मुंबई | १५ जानेवारी, इ.स. १९६७ | मराठी |
| वैऱ्याची एक रात्र | अनुवादित कादंबरी | विश्वमोहिनी प्रकाशन, पुणे | २२ मे, इ.स. १९८२ | मराठी |
| एक अरबी कहाणी | अनुवादित कादंबरी | विश्वमोहिनी प्रकाशन, पुणे | ८ ऑक्टोबर, इ.स. १९८३ | मराठी |
| लॉर्ड ऑफ दी फ्लाईज | अनुवादित कादंबरी | पॉप्युलर प्रकाशन, मुंबई | इ.स. १९८७ | मराठी |
| सोन्याचे मडके | अनुवादित कादंबरी | विश्वमोहिनी प्रकाशन, पुणे | ११ डिसेंबर, इ.स. १९९१ | मराठी |
| जी.एं. ची निवडक पत्रे; खंड १[४] | पत्रसंग्रह | मौज प्रकाशन गृह, मुंबई | १० जुलै, इ.स. १९९५ | मराठी |
| जी.एं. ची निवडक पत्रे; खंड २[४] | पत्रसंग्रह | मौज प्रकाशन गृह, मुंबई | १० जुलै, इ.स. १९९८ | मराठी |
| जी.एं. ची निवडक पत्रे; खंड ३[५] | पत्रसंग्रह | मौज प्रकाशन गृह, मुंबई | १० जुलै, इ.स. २००६ | मराठी |
| जी.एं. ची निवडक पत्रे; खंड ४[५] | पत्रसंग्रह | मौज प्रकाशन गृह, मुंबई | १० जुलै, इ.स. २००६ | मराठी |
| दिवस तुडवत अंधाराकडे | नाटक | अप्रकाशित | इ.स. १९५३ | मराठी |
अन्य भाषांमध्ये अनुवाद [संपादन]
- नियतिदान - संपादक म.द.हातकणंगलेकर, निशिकांत मिरजकर; जी.ए.मित्रमंडळ प्रकाशन; १९९२. वितरण : पॉप्युलर प्रकाशन, नई दिल्ली. जी.एं.च्या काही कथांचे हिंदी अनुवाद.
पत्रव्यवहार [संपादन]
तत्कालीन साहित्यिक वर्तुळांत, कार्यक्रमांत प्रत्यक्ष उठबस जाणीवपूर्वक टाळणाऱ्या जी. एं.चा पत्रव्यवहार मात्र दांडगा होता. त्यांनी आप्तांना, मित्रांना लिहलेली पत्रे संपादित करून त्यांचे चार खंड 'जीएं.ची निवडक पत्रे' या नावाने मौज प्रकाशनाने प्रसिद्ध केले आहेत. त्यांच्या सुनीता देशपांडे यांना लिहलेल्या दीर्घपत्रांचा संग्रह म्हणजे पहिला खंड. दुसरा खंड सत्यकथेचे-मौजचे संपादक श्री. पु. भागवत आणि राम पटवर्धन यांना लिहलेल्या पत्रांचा आहे. उरलेले दोन खंड माधव आचवल( जी. एं.चे अंतरंग मित्र), म. द. हातकणंगलेकर, कवी ग्रेस, जयवंत दळवी अशा मित्रांना लिहिलेल्या पत्रांचे आहेत. या पत्रांमुळे जी. एं.च्या अफाट वाचनाचे, व्यक्तिमत्वाच्या अनेक पैलूंचे मनोज्ञ दर्शन घडते.
संदर्भ व नोंदी [संपादन]
- ↑ संपादक म.द.हातकणंगलेकर; निळासावळा, पारवा, हिरवे रावे, रक्तचंदन या चार कथासंग्रहातील निवडक कथा.
- ↑ संपादक म.द.हातकणंगलेकर; जी.एं.च्या अप्रकाशित, व प्रकाशित परंतु असंगृहीत साहित्याचे संकलन.
- ↑ ल्यॉन सर्मेलियन (इंग्लिश: Leon Surmelian) याच्या अॅपल ऑफ इम्मॉरटॅलिटी (इंग्लिश: Apple of Immortality) पुस्तकातील काही अनुवादित कथा.
- ↑ ४.० ४.१ संपादक: म.द. हातकणंगलेकर, श्री.पु. भागवत.
- ↑ ५.० ५.१ संपादक: म.द. हातकणंगलेकर, सु.रा. चुनेकर, श्री.पु. भागवत.